सतना . पहले पिता को मुखाग्नि दी और अब गयाजी में पिता का पिंडदान कर बेटे का फर्ज निभाने वाली सतना की बेटी पूर्व महापौर ममता पांडेय ने पितरों का तर्पण कर यह संदेश दिया है कि अब माता-पिता के लिए बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। पितृपक्ष में पितरों को मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने पूर्व महापौर ममता पांडेय सोमवार को मोक्ष के तीर्थ गया पहुंच कर पिता का पहला पिंडदान किया।
वह सात दिन तक गयाजी में रहकर पितरों का तर्पण करेंगी। गौरतलब है कि ममता पांडेय के पिता की तीन संतानें हैं। बड़े भाई शिवकुमार गौतम का निधन हो जाने के बाद सिर्फ दो बहनें बची हैं। साल 2013 में जब उनके पिता जिले के प्रख्यात समाजसेवी पं जगमोहन प्रसाद गौतम की मृत्यु हुई तो उनके परिवार में पिता को मुखाग्नि देने वाला कोई और नहीं था। ऐसे में छोटी बेटी ममता पांडेय ने आगे बढ़कर पिता के लिए बेटा होने का फर्ज निभाया और उन्होंने पिता को मुखाग्नि देकर हिन्दु समाज की वर्जनाओं को तोड़ा।
नौ साल बाद अब उन्होंने अपने पितरों को गयाजी ले जाने की ठानी। उन्होंने हिन्दु रीति रिवाज का पालन करते हुए पितरों के चिता की मिट्टी ली और गया जी पहुंच कर पिंडदान किया। पूर्व महापौर ममता पांडेय ने कहा कि हिन्दु धर्म में बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं हैं, लेकिन समाज में व्याप्त कुरीतियों के कारण हमेशा बेटियां समाज में उपेक्षित रही हैं, लेकिन 21वीं सदी की बेटियां पुरुषों का हर कार्य कर पिता और परिवार के सामने बेटा होने का फर्ज निभा रही हैं।
मैंने भी अपने पिता की संतान होने का फर्ज निभाया है। मुझे उम्मीद है कि अब कोई भी माता-पिता बेटों के लिए, बेटियों से जन्म का अधिकार नहीं छीनेंगे। अब समाज भी बदल रहा है। प